Earthquake Today: आधी रात हिली धरती, कश्मीर से पाकिस्तान-अफगानिस्तान तक 6.1 तीव्रता के भूकंप से मचा हड़कंप
आधी रात जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी धरती अचानक हिलने लगी। अफगानिस्तान में आए तेज भूकंप के झटकों ने कश्मीर से लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक दहशत का माहौल बना दिया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई है। रात के सन्नाटे को तोड़ते हुए धरती के कांपने से लोगों की नींद खुल गई, कई जगह लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए।
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। वहां से उठी कंपन लहरें पूरे उत्तरी क्षेत्र में फैल गईं। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर, बारामूला, सोपोर, जम्मू समेत कई इलाकों में झटके महसूस किए गए। वहीं पाकिस्तान के इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर में भी धरती हिली। अफगानिस्तान के काबुल और जलालाबाद जैसे शहरों में तो कंपन काफी तेज महसूस हुआ।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, काबुल में भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर जमा हो गए। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और कई इमारतों में हल्की दरारें देखी गईं।
लोगों में दहशत, रातभर बनी रही बेचैनी
Earthquake Today रात करीब 12 बजे आए इस भूकंप ने नींद में डूबे लोगों को हिला कर रख दिया। कश्मीर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकल आए। सर्द रात में सड़कों पर लोगों की भीड़ लग गई। कई जगहों पर लोगों ने मस्जिदों और मंदिरों में दुआएं मांगीं।
श्रीनगर के निवासी अब्दुल रहमान ने बताया, “रात के करीब 12 बजे लगा जैसे पूरी इमारत हिल रही हो। बच्चे डर के मारे रोने लगे, हम सभी घर से बाहर भागे। थोड़ी देर बाद जब झटके थमे, तब जाकर चैन की सांस ली।”
शुरुआती रिपोर्ट: अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं
राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी देश से बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई है। हालांकि, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ इलाकों में दीवारों में दरारें और बिजली कटने की सूचना मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस भूकंप की गहराई अधिक होने के कारण सतह पर इसका प्रभाव थोड़ा कम रहा।
एक भूकंप विशेषज्ञ ने कहा, “6.1 की तीव्रता वाला भूकंप सामान्य से काफी शक्तिशाली होता है, लेकिन यदि इसका हाइपो सेंटर यानी गहराई ज्यादा हो, तो धरती की सतह पर नुकसान अपेक्षाकृत कम होता है। यही कारण है कि इस बार बड़ा विनाश टल गया।”
कश्मीर का भूकंप इतिहास – एक संवेदनशील ज़ोन
कश्मीर क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से हमेशा से संवेदनशील रहा है। यह हिमालयन टेक्टोनिक ज़ोन का हिस्सा है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेट्स लगातार एक-दूसरे से टकरा रही हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में अक्सर मध्यम से तेज भूकंप आते रहते हैं।
साल 2005 में आए 7.6 तीव्रता के भूकंप को आज भी लोग नहीं भूल पाए हैं। उस समय जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारी तबाही हुई थी। हजारों लोग मारे गए थे और लाखों बेघर हो गए थे। उस घटना ने इस क्षेत्र के भूकंपीय खतरे को उजागर कर दिया था।
प्रशासन अलर्ट मोड पर, लोगों से सावधानी की अपील
भूकंप के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर आ गईं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी इमारत में दरार दिखे तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
कश्मीर पुलिस ने कहा, “भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है। हम सभी जिलों से स्थिति की रिपोर्ट ले रहे हैं।”
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रशासन ने भी राहत और बचाव दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कई इलाकों में एहतियातन बिजली कटौती की गई ताकि किसी हादसे से बचा जा सके।
विशेषज्ञों की राय: भूकंप से सीखना ज़रूरी
Earthquake Today ,भूकंप विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर तैयारी बेहद जरूरी है। भवन निर्माण में सख्त नियमों का पालन, जागरूकता अभियान और भूकंप ड्रिल जैसी पहलें लोगों की सुरक्षा बढ़ा सकती हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के भूगर्भशास्त्री डॉ. इमरान खान ने कहा, “हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय जोनों में से एक है। हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए। लोगों को यह समझना होगा कि भूकंप पूर्व चेतावनी से नहीं आते, इसलिए तैयार रहना ही सबसे बेहतर बचाव है।”
लोग बोले – ‘रात यादगार डर बन गई’
सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कई यूजर्स ने लिखा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना तेज झटका महसूस किया। ट्विटर (X) पर #Earthquake और #KashmirQuake ट्रेंड करने लगा। एक यूजर ने लिखा, “रात को अचानक लगा जैसे पूरा घर झूल रहा हो। दिल की धड़कन तेज हो गई थी।”
राहत की खबर, लेकिन चेतावनी जारी
हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन भूकंप के बाद के झटकों (Aftershocks) की संभावना बनी हुई है। वैज्ञानिकों ने अगले 24 घंटे सतर्क रहने की सलाह दी है।
लोगों को घरों की संरचना की जांच कराने और जरूरत पड़ने पर खुले स्थानों में रहने की सलाह दी गई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित मदद पहुंचाई जा सके।
निष्कर्ष:
आधी रात आया यह भूकंप एक चेतावनी की तरह है कि धरती के भीतर चल रही गतिविधियां कभी भी बड़ा असर डाल सकती हैं। फिलहाल भले ही कोई बड़ा नुकसान न हुआ हो, लेकिन यह घटना याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना असहाय हो सकता है। सुरक्षा और सतर्कता ही भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का सबसे मजबूत हथियार है।
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