Bareilly Violence News पर बड़ा खुलासा: किसने भीड़ को भड़काया? पुलिस एफआईआर में सनसनीखेज जानकारी
उत्तर प्रदेश केBareilly Violence News में 26 सितंबर 2025 को हुई हिंसा ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया। शहर में नमाज के बाद अचानक भड़की इस हिंसा ने न सिर्फ प्रशासन की नींद उड़ा दी, बल्कि आम जनता में भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया। पुलिस जांच और एफआईआर में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। पुलिस का दावा है कि यह पूरी घटना पूर्वनियोजित साजिश का नतीजा थी, जिसमें आईएमसी संगठन और उसके अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा की भूमिका अहम बताई जा रही है।

नमाज के दौरान हुई अपील ने भड़काई भीड़
पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, आईएमसी अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा ने नमाज के दौरान लोगों को सरकार विरोधी प्रदर्शन और धार्मिक नारेबाजी के लिए उकसाया। नमाज खत्म होते ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। सरकार विरोधी नारों के साथ भीड़ ने प्रशासन को चुनौती दी और हिंसा का रूप ले लिया।
सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान
हिंसा के दौरान भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की। जीजीआईसी ऑडिटोरियम की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर कर दिए गए, बाउंड्री वॉल को तोड़ गिराया गया। पुलिस की गाड़ियां और मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त की गईं। इतना ही नहीं, भीड़ ने पुलिस की एंटी-राइट गन और वायरलेस सेट भी लूट लिए। इस हमले से न सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ, बल्कि निजी संपत्तियां भी तबाह हो गईं।
आम जनता में भय और दहशत
हिंसा की खबर फैलते ही पूरे शहर में अफरातफरी मच गई। लोग घरों में कैद हो गए, बाजार और दुकानें तुरंत बंद कर दी गईं। बरेली शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। पुलिस बल ने लगातार स्थिति को काबू करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के उग्र होने से हालात बिगड़ते चले गए।
पुलिस की सख्त कार्रवाई
घटना स्थल पर मौजूद मुख्य अपराधियों – सरफराज, मुनीफुद्दीन, अजीम अहमद, मोहम्मद शरीफ, मोहम्मद आमिर और रिहान को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान की गई और उनसे बरामद सामग्री का रिकॉर्ड भी तैयार किया गया।
पुलिस ने मौके से 253 ईंट-पत्थर, अवैध हथियार, लाठी-डंडे और टूटे बैरिकेड जब्त किए। हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने टियर गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। मानवाधिकार आयोग और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए पुलिस बल ने संयम के साथ कार्रवाई की और धीरे-धीरे हालात पर काबू पा लिया।
पूर्वनियोजित साजिश का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, यह हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि इसे पहले से प्लान किया गया था। आरोप है कि आईएमसी प्रमुख तौकीर रजा और उनके समर्थक नेताओं ने भीड़ को भड़काया और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम से सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हुआ और कानून-व्यवस्था पर गंभीर चोट पहुंची।
कानूनी कार्रवाई और धाराएँ
इस हिंसा में शामिल आरोपियों पर सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 109, 118, 121, 189, 191, 195, 196, 223, 310, 324 बीएनएसएस और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इसे कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली साजिश करार दिया है। सामाजिक संगठनों ने भी घटना की निंदा करते हुए शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
घटना के बाद बरेली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और खुफिया विभाग को सतर्क कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष
बरेली हिंसा केवल एक कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक सौहार्द पर सीधा हमला था। पुलिस की एफआईआर में सामने आए तथ्य इस ओर इशारा करते हैं कि घटना पूर्वनियोजित थी और इसके पीछे कुछ नेताओं की बड़ी साजिश थी। अब देखना यह है कि न्यायालय और प्रशासन इस पूरे मामले में किस तरह से दोषियों को सजा दिलाते हैं और भविष्य में ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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