Asia Cup final 2025: ड्रामाई जीत, विवाद और पाकिस्तान की बेइज्जती
दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए Asia Cup final 2025 के फाइनल मुकाबले ने क्रिकेट प्रशंसकों को ऐसा रोमांच दिया, जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं था। एक ओर मैदान पर भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन कर पाकिस्तान को मात देकर नौंवी बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया, तो दूसरी ओर मैच के बाद जो घटनाक्रम हुआ, उसने पूरे क्रिकेट जगत को हिला कर रख दिया।
मैदान पर भारत की शानदार जीत
Asia Cup final 2025 मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 146 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। सिर्फ 20 रन के भीतर ही तीन बड़े विकेट – अभिषेक शर्मा, सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल – गिर चुके थे। इस मुश्किल घड़ी में युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा टीम के लिए संकटमोचक बनकर उभरे।
तिलक ने पहले संजू सैमसन के साथ चौथे विकेट के लिए 57 रनों की साझेदारी की, फिर शिवम दुबे के साथ 60 रनों की अहम पार्टनरशिप निभाई। आखिर में उन्होंने रिंकू सिंह के साथ मिलकर टीम इंडिया को जीत की ओर बढ़ाया। तिलक वर्मा ने 53 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाकर न केवल टीम को जीत दिलाई बल्कि प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब भी हासिल किया।
भारत ने यह मुकाबला 5 विकेट से जीतकर एक बार फिर साबित कर दिया कि वह एशिया की सबसे मजबूत टीम है। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम अजेय रही और पाकिस्तान को तीन बार हराकर उसका मनोबल तोड़ दिया।
पाकिस्तान की शर्मनाक हरकत
मैदान पर हार के बाद पाकिस्तान टीम का रवैया भी उतना ही निराशाजनक रहा। मैच खत्म होते ही पाक खिलाड़ी सीधे ड्रेसिंग रूम में चले गए और भीतर से दरवाजा बंद कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी टीम करीब एक घंटे तक खुद को कैद किए रही। इस दौरान मैदान पर प्रस्तुति समारोह शुरू नहीं हो सका।
दर्शक और टीवी दर्शक दोनों प्रजेंटेशन का इंतजार करते रहे, लेकिन पाकिस्तानी टीम के शर्मनाक व्यवहार की वजह से सबकुछ अटक गया। जब भारतीय खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ ब्रॉडकास्टर्स से बात कर रहे थे, तब जाकर पाकिस्तान टीम धीरे-धीरे ड्रेसिंग रूम से बाहर निकली।
नकवी पर विवाद और भारतीय टीम का रुख
सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब भारतीय खिलाड़ियों ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) चीफ मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया।
नकवी पाकिस्तान के गृहमंत्री भी हैं और अक्सर भारत विरोधी बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। भारतीय टीम पहले ही साफ कर चुकी थी कि वह नकवी के हाथों ट्रॉफी नहीं लेगी। खिलाड़ियों की ओर से मांग रखी गई थी कि ट्रॉफी एमिरेट्स बोर्ड के वाइस चेयरमैन खालिद अल जरूनी द्वारा दी जाए। लेकिन यह मांग ठुकरा दी गई।
नकवी अड़े रहे कि ट्रॉफी और मेडल वही देंगे। नतीजतन भारतीय टीम ने मंच पर जाने से इनकार कर दिया। इसी कारण प्रस्तुति समारोह करीब डेढ़ घंटे तक लटका रहा और अंत में ट्रॉफी भारतीय टीम को सौंपी ही नहीं गई।
पाकिस्तान की और बेइज्जती
नकवी जब मंच पर पहुंचे तो स्टेडियम में मौजूद भारतीय दर्शकों ने “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के गगनभेदी नारे लगाए। नकवी के साथ-साथ शाहीन अफरीदी और हारिस रऊफ को भी दर्शकों ने हूट किया।
जब पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा को रनर-अप चेक सौंपा गया तो उन्होंने गुस्से में उसे फेंक दिया। उनकी इस हरकत से साफ हो गया कि हार ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। वहीं नकवी ने भी पाक टीम को मेडल देने से मना कर दिया, जिसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमिनुल इस्लाम ने उन्हें मेडल दिए।
भारतीय टीम का बिना ट्रॉफी जश्न
भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर ही बिना ट्रॉफी के जश्न मनाया। खिलाड़ियों ने टीम हडल बनाकर जीत का आनंद लिया और दर्शकों का अभिवादन किया। बाद में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नकवी के रवैये को “टुच्ची हरकत” बताते हुए कड़ी आलोचना की।
बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि यह खेलभावना के खिलाफ है। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही भारतीय टीम को ट्रॉफी और मेडल सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि नवंबर में दुबई में होने वाली आईसीसी कॉन्फ्रेंस में भारत इस मामले को उठाएगा।
ऑपरेशन ‘तिलक’ से पाकिस्तान की हार
इस फाइनल मैच को भारतीय मीडिया और फैंस ने “ऑपरेशन तिलक” का नाम दिया। क्योंकि टीम इंडिया की जीत का सबसे बड़ा नायक तिलक वर्मा ही रहे। उनकी पारी ने न सिर्फ भारत को जीत दिलाई बल्कि पाकिस्तान की रणनीति को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
पाकिस्तानी गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में कामयाब हुए थे, लेकिन तिलक ने धैर्य, तकनीक और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाकर मैच को अपने नाम कर लिया।
निष्कर्ष
एशिया कप 2025 का फाइनल क्रिकेट इतिहास के सबसे नाटकीय मुकाबलों में से एक के रूप में याद किया जाएगा। मैदान पर भारत की जीत ने जहां करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया, वहीं मैदान के बाहर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और उसके अध्यक्ष मोहसिन नकवी के रवैये ने खेल की गरिमा को ठेस पहुंचाई।
भारतीय टीम का रुख साफ था – सम्मान की कोई भी कीमत ट्रॉफी से बड़ी होती है। यही कारण है कि खिलाड़ियों ने बिना ट्रॉफी के भी जश्न मनाया और करोड़ों फैंस का दिल जीता।
इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि टीम इंडिया केवल खेल में ही नहीं, बल्कि अपने मूल्यों और गरिमा के मामले में भी सबसे आगे है।

