Breaking
20 Mar 2026, Fri

भोपाल पुलिस की बर्बरता: इंजीनियर उदित की पिटाई से मौत, दो पुलिसकर्मी निलंबित और हत्या के आरोप में नामजद

भोपाल में पुलिस की बर्बरता

भोपाल पुलिस की बर्बरता: इंजीनियर उदित की पिटाई से मौत, दो पुलिसकर्मी निलंबित और हत्या के आरोप में नामजद

राजधानी  भोपाल पुलिस की बर्बरता  एक बार फिर पुलिस की हैवानियत से कांप उठा है। शहर के पिपलानी थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यहां दो पुलिसकर्मियों ने एक निर्दोष युवक को इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौत मौके पर ही हो गई। मृतक की पहचान 22 वर्षीय उदित गायकी के रूप में हुई है, जो एक इंजीनियर था और डीएसपी केतन अडलक का साला बताया जा रहा है।

यह घटना न केवल मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि पुलिस विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के झूठे दावों का पर्दाफाश कर दिया है—मौत हार्ट अटैक से नहीं, बल्कि पुलिस की बेरहमी से हुई पिटाई के कारण हुई है।


घटना का सिलसिला: शराब पार्टी से पुलिस की हिरासत तक

भोपाल पुलिस की बर्बरता घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है। उदित अपने दो दोस्तों अक्षत भार्गव और दीपक बरकड़े के साथ इंद्रपुरी क्षेत्र में बैठकर बीयर पार्टी कर रहा था। उसी दौरान चार्ली पेट्रोलिंग पर तैनात आरक्षक संतोष बामनिया और सौरभ आर्य वहां पहुंचे। दोनों पुलिसकर्मियों ने बिना वजह तीनों युवकों को पकड़ लिया और उनसे बदसलूकी शुरू कर दी।

गवाहों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। जब उदित और उसके दोस्तों ने पैसे देने से इंकार किया, तो दोनों आरक्षक गुस्से में आगबबूला हो गए और उदित के कपड़े उतरवाकर डंडे से बुरी तरह पिटाई शुरू कर दी।

कुछ ही देर में उदित बेहोश हो गया। उसके दोस्तों ने उसे साईं अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर बताकर एम्स भोपाल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान कुछ ही घंटों में उदित ने दम तोड़ दिया।


पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुला पुलिस की बर्बरता का राज

शुक्रवार को एम्स भोपाल में उदित का पोस्टमार्टम हुआ, जिसमें पुलिस की हैवानियत का पूरा सच सामने आया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि उदित की मौत हार्ट अटैक या घबराहट से नहीं, बल्कि क्रूर पिटाई के कारण हुई थी।

डॉक्टरों के मुताबिक, उदित के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान थे। उसकी पैंक्रियाज (अग्नाशय) पूरी तरह फट गई थी, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ और उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने रिपोर्ट में लिखा है कि चोटें “अत्यधिक बल प्रयोग” के कारण आईं, जो स्पष्ट रूप से हिंसक मारपीट की ओर इशारा करती हैं।


दोनों आरोपी पुलिसकर्मी निलंबित, हत्या का केस दर्ज

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले में दोषी पाए गए दोनों पुलिसकर्मी कांस्टेबल संतोष बामनिया और सौरभ आर्य को तुरंत निलंबित कर दिया गया।

डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह दोनों के खिलाफ धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, केस दर्ज होने की भनक लगते ही दोनों आरोपी भूमिगत (फरार) हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं और अफसरों का दावा है कि उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


पीएचक्यू ने विभागीय जांच के दिए आदेश

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह बेहद गंभीर मामला है और इसमें शामिल किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।

मृतक उदित का संबंध भी पुलिस विभाग से जुड़ा था, क्योंकि उसकी बहन की शादी डीएसपी केतन अडलक, जो बालाघाट हॉक फोर्स में पदस्थ हैं, के साथ हुई है। इस कारण मामला और भी संवेदनशील बन गया है।


इंजीनियर था उदित, तीन दिन पहले ही लौटा था घर

उदित गायकी, बैंक कॉलोनी बाग दिलकुशा का रहने वाला था। उसके पिता एमपीईबी में असिस्टेंट इंजीनियर हैं और मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। उदित परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी डीएसपी से हुई है।

उदित ने सीहोर के इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई की पढ़ाई की थी। हाल ही में उसे नौकरी मिली थी और वह पिछले तीन महीने से बेंगलुरु में रह रहा था। तीन दिन पहले वह भोपाल अपने कॉलेज के दस्तावेज लेने आया था। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह यात्रा उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी।


सीसीटीवी वीडियो बना बड़ा सबूत

घटना का एक सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में एक पुलिसकर्मी उदित को पकड़कर खड़ा किए हुए है, जबकि दूसरा उसे डंडे से पीट रहा है।

वीडियो में यह भी दिखता है कि पास में दो अन्य लोग खड़े हैं, जो इस घटना को देख रहे हैं। पुलिस ने इस फुटेज को मुख्य सबूत के रूप में जब्त कर लिया है। अधिकारियों ने कहा है कि यह वीडियो कोर्ट में हत्या के अहम साक्ष्य के रूप में पेश किया जाएगा।

इसके अलावा, घटना स्थल पर मौजूद उदित के दोनों दोस्तों — अक्षत भार्गव और दीपक बरकड़े — को मुख्य गवाह बनाया गया है। उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।


थाने के बाहर हंगामा और इंसाफ की मांग

घटना की खबर जैसे ही फैली, मृतक के परिजन और समाजजन थाने के बाहर जमा हो गए। उन्होंने पूरी रात जमकर हंगामा और नारेबाजी की। भीड़ ने मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें फांसी जैसी सजा दी जाए।

परिवार का कहना है कि अगर उदित एक आम नागरिक नहीं, बल्कि किसी पुलिस अधिकारी का रिश्तेदार नहीं होता, तो शायद मामला दबा दिया जाता। लेकिन अब वे चाहते हैं कि ऐसी घटना किसी और के साथ न हो।


निष्कर्ष: पुलिस व्यवस्था पर गहरा सवाल

भोपाल में हुआ यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जनता की सुरक्षा के लिए बनाई गई पुलिस, खुद अपराध का चेहरा बनती जा रही है?
एक युवा इंजीनियर की मौत, जिसने अभी जिंदगी की शुरुआत ही की थी, सिर्फ दो वर्दीधारियों की हैवानियत की भेंट चढ़ गई।

सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए यह वक्त आत्ममंथन का है — ताकि भविष्य में ऐसी बर्बर घटनाएं दोबारा न हों।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *