मीराबाई चानू का जलवा: विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में 199 किग्रा उठाकर जीता रजत पदक
भारतीय वेटलिफ्टिंग की पहचान बन चुकी मीराबाई चानू ने एक बार फिर अपने दमदार प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। नॉर्वे के फोर्डे में आयोजित विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में उन्होंने महिला 48 किग्रा वर्ग में कुल 199 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत है बल्कि भारत के लिए भी गर्व का क्षण है।
चानू का यह तीसरा विश्व चैंपियनशिप पदक है। 2017 में वह विश्व चैंपियन बनी थीं और 2022 में रजत पदक हासिल किया था। इस बार भी उन्होंने अपने जुनून और जज्बे से साबित किया कि चोटों और चुनौतियों के बावजूद वे भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बनी हुई हैं।
चोटों से वापसी की कहानी
पिछले कुछ वर्षों में मीराबाई चानू चोटों से काफी जूझती रही हैं। इसी वजह से कई प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। लेकिन नॉर्वे में उन्होंने दिखा दिया कि असली चैंपियन वही होता है जो मुश्किलों को मात देकर लौटे।
उनकी वापसी न केवल उनके करियर के लिए अहम है बल्कि आने वाले पेरिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रजत पदक उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान देगा और अगले चार सालों में उन्हें स्वर्ण पदक के लिए और मजबूत दावेदार बना देगा।
रणनीतिक बदलाव से सफलता
इस बार मीराबाई ने 49 किग्रा वर्ग की बजाय 48 किग्रा वर्ग में उतरने का फैसला लिया। यह फैसला पूरी तरह से रणनीतिक था ताकि उनके प्रदर्शन को और निखारा जा सके। नतीजा यह रहा कि उन्होंने इस नए वर्ग में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम तक का सफर तय किया।
चानू ने कुल 199 किग्रा वजन उठाया—जिसमें 84 किग्रा स्नैच और 115 किग्रा क्लीन एंड जर्क शामिल रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वह किस स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
स्नैच में संघर्ष, क्लीन एंड जर्क में चमक
प्रतियोगिता की शुरुआत में स्नैच में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने 87 किग्रा का प्रयास दो बार किया लेकिन असफल रहीं। तीसरे प्रयास में जाकर वह 84 किग्रा वजन उठाने में सफल हुईं।
हालांकि, क्लीन एंड जर्क में उन्होंने शानदार वापसी की। मीराबाई ने तीनों प्रयासों में सफलता पाई—पहले 109 किग्रा, फिर 112 किग्रा और आखिर में 115 किग्रा। उनका यह दमदार प्रदर्शन दर्शकों को टोक्यो ओलंपिक 2021 की याद दिला गया, जब उन्होंने भारत को ऐतिहासिक रजत पदक दिलाया था।
200 किग्रा का लक्ष्य अब भी बाकी
भारतीय टीम के मुख्य कोच विजय शर्मा ने पहले ही कहा था कि इस चैंपियनशिप का मकसद मीराबाई को फिर से 200 किग्रा का आंकड़ा पार कराना है। हालांकि, इस बार वह 199 किग्रा तक ही पहुंच सकीं। बावजूद इसके, यह प्रदर्शन उत्साहजनक रहा क्योंकि चोटों से जूझने के बाद उनका इस स्तर पर लौटना किसी जीत से कम नहीं है।
प्रतिस्पर्धा का स्तर
इस मुकाबले में उत्तर कोरिया की रि सोंग गुम ने 213 किग्रा (91 किग्रा स्नैच + 122 किग्रा क्लीन एंड जर्क) उठाकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने अंतिम दो प्रयासों में 120 और 122 किग्रा वजन उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। उनका यह प्रदर्शन वेटलिफ्टिंग इतिहास में यादगार रहेगा।
वहीं, थाईलैंड की थनयाथोन सुक्चारो ने 198 किग्रा (88 किग्रा स्नैच + 110 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रतियोगिता का स्तर बेहद ऊंचा था, लेकिन मीराबाई ने रजत पदक जीतकर भारत का नाम ऊंचा किया।
टोक्यो ओलंपिक की झलक
मीराबाई का यह प्रदर्शन टोक्यो ओलंपिक 2021 की याद दिलाता है, जब उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 115 किग्रा उठाकर भारत को रजत पदक दिलाया था। उसी आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ उन्होंने नॉर्वे में भी यह उपलब्धि दोहराई।
उनके करियर में यह एक और मील का पत्थर है, जो यह बताता है कि चोटों के बावजूद उनका जोश और जज्बा बरकरार है।
भारत की सबसे बड़ी उम्मीद
मीराबाई चानू का यह प्रदर्शन बताता है कि वह अब भी भारत की सबसे बड़ी वेटलिफ्टिंग स्टार हैं। आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।
पेरिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों की दिशा में उनका यह रजत पदक एक मजबूत कदम है। यदि उनका फिटनेस स्तर और तकनीक इसी तरह सुधरता रहा तो स्वर्ण पदक उनके नाम होना तय माना जा रहा है।
निष्कर्ष
मीराबाई चानू का यह रजत पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की कहानी है।
उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सच्चे चैंपियन कभी हार नहीं मानते।
भारत की यह बेटी आने वाले वर्षों में भी देश का मान बढ़ाती रहेंगी और करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगी।
inspayer by ; amar ujala

