सेक्मोल का एफसीआरए लाइसेंस रद्द, सोनम वांगचुक की संस्था पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवा
लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़ी संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) पर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने संस्था का एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसका सीधा असर यह होगा कि अब संस्था को विदेश से किसी भी प्रकार का चंदा या फंड नहीं मिल सकेगा।
एफसीआरए नियमों के उल्लंघन का आरोप
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, संस्था ने एफसीआरए कानून के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया। इसी आधार पर गृह मंत्रालय ने 20 अगस्त 2025 को शो-कॉज नोटिस जारी किया था। इसके बाद 10 सितंबर को रिमाइंडर नोटिस भी भेजा गया। संस्था ने 19 सितंबर को अपना जवाब दाखिल किया, लेकिन मंत्रालय ने इसे असंतोषजनक मानते हुए लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया।
सेक्मोल की पृष्ठभूमि
सेक्मोल की स्थापना वर्ष 1988 में सोनम वांगचुक और उनके साथियों ने की थी। संस्था का उद्देश्य लद्दाख के युवाओं की शिक्षा, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और सतत विकास से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देना रहा है।
विदेशी फंडिंग से संस्था ने शिक्षा सुधार, जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण अनुकूल प्रोजेक्ट्स पर काम किया। कई वर्षों से यह संस्था लद्दाख में सामाजिक और शैक्षिक बदलाव की एक मिसाल मानी जाती रही है।
हालिया घटनाक्रम से जुड़ाव
गौरतलब है कि हाल ही में लेह हिंसा के बाद सोनम वांगचुक चर्चा में आए थे। स्थानीय मुद्दों को लेकर उनके तेवरों से सरकार और संस्था के बीच तनाव बढ़ा था। अब एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने के बाद संस्था की कई योजनाओं और प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सेक्मोल की गतिविधियों में बड़ी बाधा आ सकती है, क्योंकि संस्था का एक बड़ा हिस्सा विदेशी सहयोग पर निर्भर रहा है। वहीं, समर्थक इसे सरकार द्वारा असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश बता रहे हैं।
अभी यह देखना होगा कि संस्था इस फैसले को अदालत में चुनौती देती है या फिर वैकल्पिक रास्ता तलाशती है।

