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1 Dec 2025, Mon

भारत-ब्रिटेन एफटीए पर नई शुरुआत: मुंबई में मोदी-कीर स्टार्मर की मुलाकात, व्यापार व निवेश पर जोर

भारत-ब्रिटेन एफटीए

भारत-ब्रिटेन एफटीए पर नई शुरुआत: मुंबई में मोदी-कीर स्टार्मर की मुलाकात, व्यापार व निवेश पर जोर

भारत और ब्रिटेन के रिश्ते लंबे समय से व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी के आधार पर गहराते रहे हैं। गुरुवार को मुंबई के राजभवन में एक अहम मुलाकात हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर आमने-सामने आए। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत को नया जीवन दिया है।

इस बैठक का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारत और ब्रिटेन बीते दो वर्षों से एफटीए को लेकर चर्चा कर रहे हैं। अब जबकि दोनों देशों की सरकारें इस समझौते को आगे बढ़ाने पर राजी हैं, उम्मीद है कि आने वाले महीनों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई दिशा मिलेगी।


एफटीए क्यों है जरूरी?

भारत और ब्रिटेन का आर्थिक रिश्ता ऐतिहासिक है। ब्रिटेन, भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार लगातार बढ़ा है। हालांकि, अभी भी कई तरह के टैरिफ अवरोध और नियामकीय चुनौतियाँ मौजूद हैं।

एफटीए लागू होने से दोनों देशों के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

  • भारतीय आईटी, फार्मा और वस्त्र उद्योग को ब्रिटेन में बड़ा बाजार मिलेगा।
  • वहीं ब्रिटिश कंपनियों को भारत में निवेश, वित्तीय सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे।
  • एफटीए से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों की जीडीपी पर सकारात्मक असर दिखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए लागू होने से 2025 तक दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना हो सकता है।


वार्ता के मुख्य मुद्दे

दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में केवल एफटीए ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।

  1. व्यापार और निवेश – विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग पर जोर।
  2. सुरक्षा और रक्षा – हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने की बात।
  3. प्रौद्योगिकी और नवाचार – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में साझेदारी पर चर्चा।
  4. शिक्षा और कौशल विकास – भारतीय छात्रों के लिए ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में अवसर बढ़ाने और ड्यूल डिग्री प्रोग्राम को बढ़ावा देने पर सहमति।
  5. ‘विजन 2030’ साझेदारी – दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प दोहराया।

कीर स्टार्मर का भारत दौरा

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय भारत दौरा कई मायनों में खास रहा। उन्होंने पहले नई दिल्ली में उच्च स्तरीय मुलाकातें कीं और उसके बाद मुंबई पहुंचे। स्टार्मर ने भारत को ब्रिटेन का “रणनीतिक साझेदार” बताते हुए निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने का भरोसा दिलाया।

उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और ब्रिटेन इस विकास यात्रा में भागीदार बनना चाहता है। स्टार्मर ने मुंबई में भारतीय उद्योगपतियों से भी मुलाकात की और उन्हें ब्रिटेन में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।


‘विजन 2030’ से क्या बदलेगा?

भारत और ब्रिटेन ने 2021 में ‘विजन 2030’ साझेदारी ढांचा लॉन्च किया था। इसका मकसद है—

  • व्यापार और निवेश को नई ऊंचाई देना
  • रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना
  • जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर मिलकर काम करना
  • शिक्षा, संस्कृति और आपसी संपर्क को बढ़ाना

मोदी और स्टार्मर ने इस बार फिर से इस फ्रेमवर्क पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन संबंध सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम होंगे।


भारत के लिए फायदे

  • भारतीय आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र को ब्रिटेन में और बड़ा बाजार मिलेगा।
  • मेड-इन-इंडिया उत्पादों पर ब्रिटेन में टैरिफ कम होंगे, जिससे निर्यात बढ़ेगा।
  • ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
  • ब्रिटेन से ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलने की संभावना।

ब्रिटेन के लिए फायदे

  • ब्रिटिश कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में प्रवेश का मौका।
  • रक्षा और सुरक्षा उद्योग में नए कॉन्ट्रैक्ट्स।
  • भारतीय स्टार्टअप्स और आईटी सेक्टर से साझेदारी।
  • दक्षिण एशिया में भारत के जरिए क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने का अवसर।

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि एफटीए पर सहमति बनने के बावजूद कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं।

  • भारत ब्रिटिश शराब और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर ज्यादा रियायत देने से हिचकिचा रहा है।
  • ब्रिटेन भारतीय वीज़ा नीतियों और कामगारों के लिए शर्तों को लेकर सतर्क है।
  • कृषि और डेयरी सेक्टर भी दोनों देशों के बीच टकराव का कारण बन सकता है।

इन सबके बावजूद, दोनों पक्ष इस समझौते को 2025 के मध्य तक लागू करने का लक्ष्य रख रहे हैं।


निष्कर्ष

मोदी और स्टार्मर की मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि भारत और ब्रिटेन दोनों ही अपनी साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एफटीए को लेकर बनी सहमति से न केवल आर्थिक रिश्तों में तेजी आएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी भी और मजबूत होगी।

भारत के लिए यह अवसर है कि वह अपनी आर्थिक ताकत और नवाचार क्षमता को ब्रिटेन जैसे विकसित देश के साथ जोड़कर आगे बढ़े। वहीं ब्रिटेन के लिए यह मौका है कि वह ब्रेक्ज़िट के बाद की दुनिया में भारत जैसे उभरते बाजार के साथ अपने रिश्तों को गहरा करे।

निस्संदेह, यह मुलाकात भारत-ब्रिटेन रिश्तों के लिए एक नया अध्याय लिख रही है, जिसका असर आने वाले दशकों तक दिखाई देगा।

 

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