जया बच्चन की नेकदिली का खुलासा: सुशांत दिवगीकर ने बताया कैसे मदद करती हैं जरूरतमंद बच्चों की
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद जया बच्चन अक्सर अपने बयानों और पैपराजी से टकराव को लेकर चर्चा में रहती हैं। कई बार उन्हें मीडिया और फैंस पर नाराज़ होते हुए देखा गया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “रूखा” और “गुस्सैल” कहकर ट्रोल कर देते हैं। लेकिन हाल ही में अभिनेता और सिंगर सुशांत दिवगीकर (जिन्हें रानी कोहिनूर नाम से भी जाना जाता है) ने एक लंबा नोट लिखकर जया बच्चन के व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष सामने रखा है। यह पोस्ट अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
सुशांत दिवगीकर का खुलासा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुशांत दिवगीकर ने अपने नोट में लिखा कि पिछले कई सालों से उन्होंने जया बच्चन को बच्चों और जरूरतमंदों की मदद करते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि जया बच्चन के बारे में सोशल मीडिया पर बनाई गई छवि पूरी तरह से झूठी और भ्रामक है।
सुशांत लिखते हैं – “मैंने भी और आपमें से कई लोगों ने जया दी के साथ बेरहमी से ट्रोलिंग और गाली-गलौज देखी होगी। उनके बारे में एकतरफा कहानियाँ गढ़ी गईं और लोग बिना सोचे-समझे उन पर घटिया बातें कहने लगे। यह देखकर बहुत दुख होता है कि जो लोग उनकी असलियत नहीं जानते, वे इतनी जल्दी उन्हें जज कर लेते हैं।”
पहली मुलाकात और मदद का सिलसिला
सुशांत ने बताया कि उनकी जया बच्चन से पहली मुलाकात उस समय हुई थी जब वह महज 14 साल के थे। उनके माता-पिता दृष्टिबाधित और ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों की मदद के लिए मुंबई के एक एनजीओ “डीईईडीएस” के साथ मिलकर एक क्विज का आयोजन कर रहे थे।
उस कार्यक्रम में रवीना टंडन, क्रिकेटर युवराज सिंह और जया बच्चन मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थीं। तभी से जया उनकी मां के संपर्क में रहने लगीं।
सुशांत ने लिखा कि जया बच्चन ने वर्षों तक देशभर के कई गांवों और कस्बों में जाकर बच्चों की शिक्षा, उनके मासिक और वार्षिक राशन, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए वित्तीय मदद दी। इतना ही नहीं, उन्होंने कई परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च भी उठाए।
मदद पर एक ही शर्त – मीडिया न आए
सुशांत का कहना है कि जया बच्चन ने कभी भी अपनी इन सामाजिक गतिविधियों का प्रचार नहीं किया। वह हमेशा चाहती थीं कि जरूरतमंदों को मदद मिले लेकिन यह बात मीडिया में न आए। सुशांत ने बताया – “जया जी कहती थीं कि असली मदद वही है, जिसे बिना दिखावे के किया जाए। इसलिए उन्होंने हमेशा मीडिया को इससे दूर रखा।”
एचआईवी और कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए काम
जया बच्चन की नेकदिली का जिक्र करते हुए सुशांत ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पति और महानायक अमिताभ बच्चन के साथ मिलकर एचआईवी संक्रमित बच्चों के लिए फिल्म पा की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की थी। इसके अलावा कैंसर से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों की भी लगातार आर्थिक और भावनात्मक मदद की।
क्यों होती हैं ट्रोल?
दरअसल, जया बच्चन अक्सर कैमरों पर गुस्सा करती नजर आती हैं। चाहे पैपराजी पर नाराज़गी हो या संसद में उनका बेबाक अंदाज—सोशल मीडिया पर इन पलों को ही बार-बार दिखाया जाता है। इसी वजह से उनकी एक “रूड” इमेज बन चुकी है। कई बार लोग उनकी बातों को संदर्भ से हटाकर वायरल कर देते हैं।
लेकिन सुशांत के खुलासे ने यह दिखा दिया है कि कैमरे के पीछे जया बच्चन का व्यक्तित्व कितना संवेदनशील और उदार है।
सोशल मीडिया पर बहस
सुशांत के पोस्ट के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि उन्हें हमेशा से शक था कि जया बच्चन उतनी कठोर नहीं हैं जितना दिखाया जाता है। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि उनका गुस्सा सही नहीं है, लेकिन यह जानकर अच्छा लगा कि वह इतनी बड़ी सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं।
निष्कर्ष
जया बच्चन को लेकर हमेशा यह धारणा रही है कि वह कठोर स्वभाव की हैं और मीडिया के प्रति उनकी नाराजगी लोगों को खटकती है। लेकिन सुशांत दिवगीकर के खुलासे ने यह साबित कर दिया कि वह दिल से बेहद उदार और मददगार इंसान हैं।
बिना किसी प्रचार और दिखावे के उन्होंने वर्षों तक हजारों बच्चों और परिवारों की मदद की। यह उनकी संवेदनशीलता और वास्तविक मानवीयता को दर्शाता है।
शायद अब लोगों को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली तस्वीर हमेशा पूरी सच्चाई नहीं होती।

