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20 Mar 2026, Fri

उत्तर प्रदेश बनेगा वैश्विक फूड बास्केट, मुख्यमंत्री योगी ने रखा 2030 का विज़न

उत्तर प्रदेश 2030 तक बनेगा ग्लोबल फूड बास्केट, सीएम योगी का बड़ा ऐलान

उत्तर प्रदेश बनेगा वैश्विक फूड बास्केट, मुख्यमंत्री योगी ने रखा 2030 का विज़न

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आइसार्क) में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्य की कृषि को 2030 तक वैश्विक फूड बास्केट बनाने का संकल्प दोहराया। यह आयोजन कृषि विभाग की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर 5 से 7 अक्टूबर तक हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 11 वर्षों में कृषि प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, फसल बीमा, एमएसपी जैसी योजनाओं का लाभ मिला है। इसके साथ ही 10 करोड़ किसानों को प्रतिवर्ष किसान सम्मान निधि से सीधा फायदा हो रहा है। सीमित क्षेत्रफल (देश के कुल क्षेत्र का मात्र 11%) होने के बावजूद उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय खाद्य उत्पादन में 21% योगदान देता है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की जलवायु और कृषि-पर्यावरणीय परिस्थितियां असीम संभावनाओं से भरी हैं। बीते वर्षों में सरकार के प्रयासों से अनाज, दाल, तिलहन और सब्जियों का उत्पादन पाँच गुना बढ़ा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संतुलन से ही किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कलानमक धान का उल्लेख किया, जो उत्तर प्रदेश का वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) है और ऐतिहासिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि यह धान भगवान बुद्ध को महाप्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता था। आइसार्क के प्रयासों से ऐसी स्थानीय किस्मों की पहचान और मूल्य संवर्धन संभव हुआ है।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी राज्य की कृषि प्रगति पर अपने विचार रखे और आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह सहित संस्थान के सभी शोधकर्ताओं की सराहना की। उन्होंने आइसार्क के संस्थापक निदेशक स्व. डॉ. यू.एस. सिंह को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि ज्ञान उत्पादों और मशीनरी नवाचारों का अनावरण किया और किसानों को मिनी किट्स वितरित कीं। यह पहल किसानों को तकनीकी सहयोग और आधुनिक खेती की दिशा में प्रोत्साहित करने का प्रतीक है।

कार्यक्रम में भारत के साथ-साथ श्रीलंका, कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों के कृषि विशेषज्ञ भी शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश में क्लाइमेट-स्मार्ट, तकनीक-आधारित और सतत कृषि के नए मॉडल विकसित किए जाने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि उत्तर प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे इरी (IRRI) और सिप (CIP) की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर किसानों को वैश्विक तकनीकों से जोड़ रहा है। इसी प्रयास से प्रदेश न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए खाद्य आपूर्ति का भरोसेमंद केंद्र बनेगा।

 

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